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सपा विधायक नाहिद की गिरफ्तारी रोकने की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा सरेंडर करें

इलाहाबाद / प्रयागराज : समाजवादी पार्टी के शामली के कैराना विधानसभा क्षेत्र के सपा विधायक नाहिद हसन की मुश्किलें बढती ही जा रही हैं। सांसद विधायक स्पेशल कोर्ट के बाद अब हाईकोर्ट ने भी विधयक नाहिद को बड़ा झटका दिया है और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। उच्च अदालत ने साफ लहजे में कहा है कि वह निचली अदालत में खुद को सरेंडर करें। हालांकि सरेंडर प्रक्रिया के दौरान पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार न करने को कहा गया है। गौरतलब है कि विधायक नाहिद की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गयी थी और धोखाधड़ी, फर्जी कागजात बनाकर जमीन कब्जा करने, पैसा हड़प करने के मामले में दर्ज मुकदमे को रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक की मांग की थी। हालांकि उच्च अदालत ने इस मामले में विधायक को सीधे तौर पर राहत देने से इन्कार कर दिया और कहा कि वह निचती अदालत में खुद को सरेंडर कर दें।

क्या है मामला
अदालत में दाखिल याचिका के अनुसार विधायक नाहिद पर  17 जनवरी 2018 को एक मुकदमा दर्ज किया गया था। जिनमें उन पर धोखाधड़ी, फर्जी कागजात बनाकर जमीन कब्जा करने, पैसा हड़प करने जैसे आरोप थे। मुकदमे में विधायक सहित 13लोग आरोपी बनाये गये हैं और मुकदमा मोहम्मद अजीज की ओर से दर्ज कराया गया है। इसी मामले में निचली अदालत से विधायक के विरूद्ध गिरफ्तारी का वारंट जारी हो चुका है। गिरफ्तारी से बचने के लिये नाहिद हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे थे। लेकिन, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है।

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करना होगा सरेंडर
इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई शुरू की तो विधायक की ओर बताया गया कि वह मौजूदा समय में विधायक हैं और दो बार विधायक चुने गये हैं। उनकी छवि को खराब करने के लिये यह झूठा केस उन पर दर्ज कराया गया है। इसलिये यह मुकदमा रद्द किये जाने के साथ उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाये। वहीं, सरकार की ओर से पेश हुये अपर शासकीय अधिवक्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि निचली अदालत से नाहिद के विरूद्ध सम्मन, वारंट जारी हुआ, लेकिन वह अदालत की कार्रवाई में हाजिर नहीं हुये। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद भी इनका रवैया बदस्तूर वैसा ही रहा। मौजूदा समय में उनके विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा के तहत 82 का आदेश निचली अदालत ने जारी कर दिया है तथा इनकी अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र 24 सितंबर को ही निचली अदालत ने खारिज कर दिया है। चूंकि याची के विरुद्ध प्रथम दृष्टया केस बनता है और वह अदालत की कार्रवाई के तहत गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।

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Written by Amarish Shukla

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