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पितृपक्ष के दौरान भूल कर न करे ये काम, वरना हो जायेंगे बर्बाद

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मृत्यु के बाद हमें अपने पूर्वजों को पितृ की संज्ञा देते है। हिन्दू धर्म में इन पितरों के लिये वर्ष में कुछ दिन निश्चित किये हैं।

उन चंद दिनों को ही हम पितृपक्ष अथवा श्राद्ध कहा जाता है। इस दौरान हम अपने मृत पूर्वजो के निमित्त दान, यज्ञ करते है।

पितरों के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह करना हमारा फ़र्ज है। उन्हें कर लेने में कोई बुराई नही है।

यह बात बिल्कुल ठीक है, कि पितृश्राद्ध हमेशा बड़े बेटे को ही करना होता है।

मगर अन्य बच्चों को भी तर्पण अर्थात जल अवश्य चढ़ाना चाहिए।

उनके निमित्त दान-पुण्य बृह्मभोज आवश्यक है।

पितृपक्ष में बनने वाली खाद्य सामग्री तथा यज्ञादि में गाय के दूध से बने पदार्थों अर्थात दूध, दही, घी आदि का प्रयोग करना चाहिये। तर्पण हमें तड़के अर्थात सुबह के समय में ही करना चाहिये।

तर्पण से पहले कुछ भी खाना-पीना नही चाहिये। सामर्थ्य के अनुसार चांदी के बर्तनों में ही खाना आदि परोसे।

अन्यथा तांबे, पीतल या स्टील के साफ बर्तनों का प्रयोग करे। कहा जाता है,

कि चांदी का उत्पाद भगवान शिव के नेत्र से हुआ है।

तर्पण में कुश, काले तिल, गंगाजल, गाय दूध,तुलसी का अवश्य प्रयोग करे।

ये सभी चीजें अति पवित्र मानी गई है।

श्राद्ध करते समय सफेद वस्त्र ही धारण करे। श्राद्ध का भोजन करने एवं करवाने वाले को मौन रहना चाहिए।

दान देते वक्त हाथ में काला तिल, जौ, कुश एवं जल रखकर ही दान करे।

तो इस तरह आप श्राद्ध या पितृपक्ष कर सकते है।

यह जानकारी आपको कैसी लगी हमे कमेंट में जरुर बताये और साथ ही ऐसी ही अन्य जानकारियों के लिए National TV को फोलो करे. 



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