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वरिष्ठ पत्रकार राजनाथ सिंह सूर्य को लखनऊ ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

lucknow paid tribute to senior journalist late rajnath singh surya
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लखनऊ। राज्यसभा सांसद रहे वरिष्ठ पत्रकार राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ को राजधानी लखनऊ के पत्रकारों, नेताओं और समाजसेवियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लखनऊ में ही 13 जून को उनका निधन हुआ था। lucknow paid tribute to senior journalist late rajnath singh surya

बहुभाषी न्यूज एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार के निदेशक रहे राजनाथ सिंह सूर्य के निधन पर विश्व संवाद केंद्र के श्री अधीश स्मृति सभागार में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ, जिसमें वक्ताओं ने उनके पत्रकारिता और राजनीतिक जीवन के कृत्यों को याद किया।

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हिन्दुस्थान समाचार और विश्व संवाद केंद्र लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र भदौरिया ने कहा कि मृत्यु विराम लगा सकती है लेकिन कीर्ति पताका को नहीं हिला सकती है। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह सूर्य का जाना सबको खल गया है। वह सबको साथ लेकर चलने वाले थे। जो उनके जीवन में आता था, उसे वह आगे बढ़ाते थे। वह इतने सरल थे कि सबकी पहुंच में थे।

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सूर्य जी के स्वभाव में लीपापोती करना नहीं था
राजनाथ सिंह सूर्य के जीवन से जुड़े एक प्रसंग का जिक्र करते हुए विश्व संवाद केंद्र लखनऊ के अध्यक्ष नरेन्द्र भदौरिया ने बताया कि सूर्य जी ने प्रधानमंत्री चैधरी चरण सिंह से एक बार उनकी प्रेसवार्ता में कहा था कि समाज का नायक अगर जनता के मनोबल को तोड़ेगा तो जनता नकार देगी। उन्होंने कहा कि सूर्यजी अपनी बात निर्भीकता के साथ रखते थे। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की प्रेसवार्ता में भी उन्होंने उन पर ऐसा सवाल उठाया कि सब भौचक्के रह गए। सूर्य जी के स्वभाव में लीपापोती करना नहीं था। वह कहते थे कि सब कुछ कहा जा सकता है, बशर्ते भाषायी मर्यादा बनाए रखी जा सके।

राजनाथ के नाम पर बनेगा संदर्भ पुस्तकालय

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने इस मौके पर बताया कि सूर्य जी की स्मृति में प्रदेश सरकार एक पत्रकारिता सम्मान तथा उनके नाम पर एक संदर्भ पुस्तकालय स्थापित करने की योजना बना रही है। उनकी स्मृति में एक पुस्तक का प्रकाशन किया जाना भी प्रस्तावित है।

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श्री तिवारी ने बताया कि सूर्य जी खबरों की खान थे। राजनाथ सिंह ने जो आयाम कायम किए हैं, हम सब उसी धारा में बढ़ने का प्रयास करते रहेंगे। सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कभी दोहरी जिंदगी जीने का प्रयास नहीं किया। मैं उनकी हिम्मत की दाग दूंगा कि वह खुलेआम कहते थे कि मैं संघ की विचारधारा से आया हूं। पत्रकारिता में वह असाधारण व्यक्तित्व थे। जिसने जीवन भर विद्या और ज्ञान का दान किया और मरने पर उनकी देह का दान किया गया।

स्व. सूर्य ने महर्षि दधीचि की परंपरा का निर्वहन किया

केंद्रीय मंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि राजनाथ सिंह सूर्य जी हमेशा राष्ट्रीय विचारधारा के परिप्रेक्ष्य में अपनी बात कहते थे। उनमें एक निर्भीक पत्रकार, संवेदनशील राजनेता और जागरूक नागरिक होने के गुण दिखाई पड़ते थे। जीवन के अंतिम क्षण तक वह लेखन के प्रति सक्रिय रहे। उन्होंने महर्षि दधीचि की परंपरा का निर्वहन करते हुए विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु देहदान किया। चिरंतन तक जैसे सूर्य की रश्मियां चमकती हैं, वैसे ही पत्रकारिता के इस सूर्य के विचार देश को दिशा देते रहेंगे। डाॅ. पांडेय ने कहा, ‘मैं भारत सरकार, भाजपा और निजी स्तर पर सूर्य जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।’

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राजनाथ सिंह सूर्य के नाम पर होगा पार्क
अपने श्रद्धांजलि भाषण में लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि राजनाथ सिंह सूर्य हमारे लिए संरक्षक की तरह थे। उनके साथ अक्सर चर्चा होती थी। उन्होंने मुझे नगर निगम के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। उनके मोहल्ले के पार्क का सुंदरीकरण कर उसका नामकरण राजनाथ सिंह सूर्य के नाम रखा जाएगा। पत्रकारपुरम का नामकरण भी सूर्यजी के नाम पर कराए जाने का प्रयास किया जाएगा। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने उनके नाम पर पत्रकारिता सम्मान देने का अनुमोदन कर दिया है।

संघ, राजनीति और पत्रकारिता में उनका संतुलन अद्भुत था

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सह संघचालक डॉ. हरमेश चैहान ने इस अवसर पर कहा कि लखनऊ में राजनाथ सिंह का कितना सम्मान था यह उनकी स्मृति में होने वाले आयोजनों में उपस्थित होने वाले लोगों की संख्या से पता चलता है। वह संघ कार्यकर्ता के न्यूनतम चार गुणों खोपड़ी ठंडी, मुंह में शक्कर, दिल में आग और पैर में चक्कर का यथावत पालन करते थे। सूर्य हमेशा चलता रहेगा, उनकी यात्रा भी यथावत चलती रहेगी। संघ, राजनीति और पत्रकारिता में उनका संतुलन अद्भुत था।

मैं स्वयंसेवक के साथ ही पत्रकार भी हूं

पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख नरेन्द्र सिंह ने बताया कि मैं विद्यार्थी जीवन में उनके पास जाया करता था। वह चाय पीने के बाद कप खुद उठाकर रखते थे। संगठन की योजना के लिए वह सहमति अथवा असहमति पर ध्यान नहीं देते थे। वह कहते थे कि मैं स्वयंसेवक के साथ ही पत्रकार भी हूं। हालांकि, कई बार वह संघ अथवा भाजपा की धारा के विपरीत जाकर भी लिखते थे।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र कार्यवाह राजकुमार जी का शोक संदेश प्रांत सह कार्यवाह प्रशांत भाटिया ने पढ़ा। उन्होंने कहा कि राजनाथ जी ने स्वयंसेवकों के सामने एक अनुकरणीय प्रतिमान स्थापित किया। इसलिए उनके प्रति सच्ची श्रद्धाजलि यही होगी कि हम उनके पथ का अनुगमन कर सकें।

राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने कहा कि राजनाथ सिंह सूर्य की यादों की कथा अनंत है। उनसे हमारा नाता 28 वर्षों तक रहा। वह बताते थे कि राष्ट्रवादी नजरिए से लिखो पर तथ्यों को कभी मत छिपाओ। इतने वरिष्ठ पत्रकार के साथ मुझ जैसे कनिष्ठ को कभी कोई असुविधा नहीं होती थी। क्योंकि वह व्यवहार के स्तर पर बहुत सहज और सरल थे। वह अक्सर छोटी-छोटी -बातों को अक्सर समझाते थे।

श्री सिंह ने बताया कि श्रीराम मंदिर आन्दोलन के समय अयोध्या में रिपोर्टिंग के दौरान मैं भी राजनाथ सिंह के साथ था। उन्होंने राममंदिर आंदोलन पर बेबाक कलम चलाई। कभी-कभी संकेतों में वह बताते भी थे कि इसी कारण उनको स्वतंत्र भारत अखबार से जाना भी पड़ा। कलम के ऐसे बेबाक सिपाही को हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।

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रामनिवास जैन ने कहा कि उनके लेख मार्गदर्शन प्रदान करते रहते थे। वह अपने आप में एक संस्था थे। हर विषय पर मौलिक लेखन करते थे। राष्ट्रधर्म के प्रभारी निदेशक सर्वेश द्विवेदी ने कहा कि वाणी और आलेख दोनों में राजनाथ की समान पकड़ थी। एकता, अखंडता, बंधुता, सरोकार, सहकार और समाजहित के प्रति उनका पूरा जीवन समर्पित रहा। सूर्य जी का पूरा जीवन राष्ट्र को परम वैभव के लिए समर्पित कर दिया था।

कार्यक्रम के दौरान हिन्दुस्थान समाचार समूह के अध्यक्ष आर.के. सिन्हा और समूह संपादक पद्यश्री रामबहादुर राय का शोक संदेश समाचार समन्वयक पीएन द्विवेदी ने पढ़कर श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री सिन्हा ने अपने शोक संदेश में स्व. राजनाथ सिंह को बड़ा भाई कहकर संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि राजनाथ के निधन एक ऐसे अध्याय का अंत है, जिसे हिन्दी पत्रकारिता में सदियों तक याद किया जाएगा।

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श्री सिन्हा ने अपने शोक संदेश में यह भी लिखा था, ‘अभी पिछले सप्ताह ही उनका फोन आया था और मैंने जब उन्हें बताया कि पांच जुलाई को दिल्ली में हिन्दुस्थान समाचार के निदेशक मंडल की बैठक होगी तब वे प्रसन्न हुए और कहा कि मैं कुछ ज्यादा दिन रहूंगा और सेंट्रल हाॅल में सब नये पुरानों से मुलाकात हो जाएगी, लेकिन ऐसा हो न सका।’

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वहीं पद्यश्री रामबहादुर राय ने अपने शोक संदेश में राजनाथ सिंह को एक इतिहास पुरुष बताया। उन्होंने कहा, ‘राजनाथ जब चलते थे, उठते-बैठते थे तो उनके साथ वह समय भी छाया बनकर चलता था। वह उज्जवल अतीत था, जिसमें समाज सेवा, पत्रकारिता, सार्थक राजनीति और भारत के लिए सुनहरे सपने का एक लंबा-चैड़ा जीवन था, जिसे उन्होंने जिया।’

इन्होंने भी दी श्रद्धांजलि
इस मौके पर विश्व संवाद केंद्र के सचिव अशोक कुमार सिन्हा, भारतीय नागरिक परिषद के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश अग्निहोत्री, केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार, वरिष्ठ पत्रकार भाष्कर दुबे, लखनऊ उपजा के अध्यक्ष भारत सिंह, हेमेंद्र सिंह तोमर, नंदकिशोर श्रीवास्तव, प्रेस काउंसिल के सदस्य डा.रजा रिजवी, हिन्दुस्थान समाचार के स्टेट ब्यूरो चीफ राजेश तिवारी, आरएसएस के प्रचार विभाग के डा. अशोक दुबे, डा. लोकनाथ, दिवाकर, राजेश राय, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव व अशोक पांडेय, भाजपा नेता ओमप्रकाश पांडेय ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रधर्म पत्रिका के प्रबंध संपादक डॉ. पवनपुत्र बादल ने किया।

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Written by National TV

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