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भीम की तरह मोक्ष के लिए स्वयं का पिंडदान कर कराया तेरहवीं का भोज, छपवाया शोक के बदले शुभ संदेश का कार्ड

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मध्य प्रदेश : बालाघाट से लगी ग्राम पंचायत गोंगलई में पोंगी महाजन ने मरने के बाद मोक्ष की आस पूरी होती न देख स्वयं का पिंडदान कर तेरहवीं का भोज ग्रामीणों को कराया। गंगापूजन व तेरहवीं के कार्यक्रम के बाद रात में कीर्तन किया गया।

किसी की मौत होने के बाद परपंरानुसार मरने वाली की आत्मा को शांति के लिए पिंडदान, गंगापूजन व तेरहवीं के कार्यक्रम किए जाते हैं। इसकी सूचना शोक संदेश के जरिए दी जाती है। पर पोंगी महाजन ने अपनी ही तेरहवीं में लोगों को शामिल करने के लिए शोक संदेश के बदले शुभ संदेश का कार्ड छपवाया।

75 वर्षीय वृद्घ संतलाल लिल्हारे उर्फ पोंगी महाजन कबाड़ का व्यापार करते हैं। उनके दो बेटे व दो बेटी हैं, जिसमें से छोटे बेटे की मौत हो चुकी है और बड़ा बेटा उनसे अलग अपने परिवार के साथ रहता है। वर्तमान में संतलाल छोटी बहू व पोती के साथ रहते हैं, लेकिन मरने के बाद किसी के द्वारा अपना क्रियाकर्म करने की उम्मीद होता न देख उन्होंने जीते जी ही अपना क्रियाकर्म करने का निर्णय लिया।

तेरहवीं व गंगापूजन कार्यक्रम को संपन्न कराने पहुंचे नैतरा के पंडित तावेलप्रसा तिवारी ने बताया कि अपने जीवन के मोक्ष के लिए मनुष्य स्वयं की तेरहवीं कर सकता है। इससे मनुष्य को संतुष्टि होगी कि उसने अपने पाप, पुण्य कर्म से मुक्ति पाने के लिए कुछ बेहतर करने का प्रयास किया है। मरने के बाद मनुष्य को क्या पता कि उसके साथ क्या हो रहा है और उसके परिवार वाले उसके मोक्ष के लिए क्या कर रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार भी मनुष्य मोक्ष की प्राप्ति के लिए अपना पिंडदान कर सकता हैं। महाभारत में भी भीम ने मोक्ष के लिए पिंडदान करवाया था।

संतलाल लिल्हारे उर्फ पोंगी महाजन ने अपनी ही तेरहवीं में लोगों को शामिल करने के लिए शोक संदेश के बदले शुभ संदेश का कार्ड छपवाया और इसमें सभी से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने का निवेदन किया। संतलाल ने अपना पिंडदान रजेगांव स्थित नदी के घाट पर किया है।

 



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