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अखिलेश सरकार में जाति विशेष के लिये लेखपाल भर्ती में हुई थी धांधली, अध्यक्ष समेत 7 पर FIR

प्रयागराज / इलाहाबाद ।  उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तहत हुई लेखपाल भर्ती में बड़ी धांधली सामने आई है । इसमें चहेतों को फायदा पहुंचाकर चयनित किया गया। और 925 अनारक्षित पदों पर पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को चयनित कर लिया गया। इस मामले में धांधली की जांच पूरी होने के बाद अब कार्यवाही का क्रम शुरू हो गया है। चकबंदी विभाग के उप संचालक उमेश गिरी की तहरीर पर तत्कालीन अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष राज किशोर यादव समेत सात लोगों पर एफ आई आर दर्ज किया गया है । लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है और अब इनके विरुद्ध कार्यवाही कानूनी कार्यवाही शुरू होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष-सचिव के साथ ही संबंधित अफसरों के खिलाफ षड्यंत्र रचकर आपराधिक कृत्य करने के लिए रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैैं। वर्तमान में कार्यरत सभी अफसरों को निलंबित कर उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी केस दर्ज होगा।

जांच में हुआ खुलासा
सपा सरकार के कार्यकाल में चकबंदी लेखपाल के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी । इस भर्ती में 925 अनारक्षित पदों पर गलत तरीके से पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को चयनित कर लिया गया । इस मामले की शिकायत हुई और अनियमितता का आरोप लगा तो भर्ती प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई। योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया की जांच करने के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया । कमेटी की जांच रिपोर्ट में इस भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली को उजागर करते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है । इस रिपोर्ट में ही बताया गया है कि  925 अनारक्षित पदों पर अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया था। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई का निर्देश दिया था। जिसके क्रम में अब चकबंदी विभाग की तरफ से उपसंचालक उमेश गिरि ने तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है

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इन पर दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस के अनुसार चकबंदी लेखपाल भर्ती में गड़बड़ियों के मामले में  अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन चेयरमैन राजकिशोर यादव समेत सात के खिलाफ  हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया। इसमे सपा से विधान परिषद सदस्य संजय लाठर की पत्नी बबिता लाठर, चकबंदी विभाग के अपर संचालक सुरेश सिंह यादव, अब्दुल गनी, केशवराम, विनय श्रीवास्तव और महेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। जबकि इससे पूर्व  सुरेश सिंह यादव और प्रशासनिक अधिकारी बिहारी लाल के खिलाफ भी धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार की धाराओं में केस दर्ज हुआ है। कार्रवाई के तौर पर सुरेश को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।

क्या है मामला
वर्ष 2015-16 में तत्कालीन अखिलेश सरकार के दौरान चकबंदी लेखपालों के रिक्त 2831 पदों को भरने का अधियाचन चकबंदी निदेशालय से उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन को भेजा गया। जिसमे 1901 सामान्य श्रेणी के थे। लेकिन आयोग ने सामान्य वर्ग के 1901 के बजाय 920 पद ही चयन किया और बाकी पदो पर ओबीसी के अभ्यर्थी चयनित किये। जिससे ओबीसी के निर्धारित 769 पदों के अधियाचन पर 1694 अभ्यर्थियों का चयन हो गया।  यहीं पर सबसे ज्यादा गडबडी भी की गई । क्योकि जिन 925 अभ्यर्थियों को चयनित किया गया वह ज्यादातर जाति विशेष के थे।

क्या है रिपोर्ट मे
कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार द्वारा की गई उच्च स्तरीय जांच में खुलासा हुआ है कि कवरिंग लेटर में तो अधियाचन के मुताबिक चयन दिखाया गया लेकिन सूची में चयन में गडबडी की गयी थी। इसके बाद चकबंदी आयुक्त कार्यालय ने इसी गडबडी पर मुहर लगाकर चहेतो को तैनाती दे दी। यानी आयोग और चकबंदी विभाग के अफसरों की मिलीभगत से गड़बड़ी की गयी थी। जिसके आधार पर मुख्यमंत्री ने आयोग ने कार्रवाई करने को मंजूरी दी है।

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Written by Amarish Shukla

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