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बाल्यकाल से ही दें बच्चों को संस्कारों का उपहार : गीता परिवार

geeta parivar arjun bhav sanskar path camps teached children from workshops
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लखनऊगीता परिवार के तत्वावधान में तीन दिवसीय संस्कारों की पाठशाला की शुरूआत प्राथमिक विद्यालय कसौनी तथा दुर्गापूजा पार्क राजाजीपुरम में किया गया। geeta parivar arjun bhav sanskar path camps teached children from workshops

वहीं चल रहे तीन दिवसीय अर्जुन भव संस्कार पथ शिविरों का समापन हुआ। झगड़ेश्वर महादेव मंदिर मशकगंज में ध्यान में गौरवी, कौन बनेगा ज्ञानपति स्पर्धा में ध्रुव पाल, गीता श्लोक में कृति माहेश्वरी, रचनात्मक कार्यशाला में जानवी सोनी, सर्वश्रेष्ठ शिविरार्थी में अंजलि अव्वल रही।

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वहीं एलपीएस पार्क राजाजीपुरम में भगवद्गीता श्लोक कंठस्थ स्पर्धा में हर्षराज, अर्जुन साधना में विट्ठल द्विवेदी, आदर्श शिविरार्थी में तेजस राज ने बाजी मारी।  सभी शिविरों में अखबार बनाएं फैन्सी ड्रेस स्पर्धा का भी आयोजन किया गया।

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जिससे बच्चों की रचनात्मक कार्यकुशलता एवं बौद्धिक क्षमता का परिचय मिलता है। मुख्य अतिथियों ने प्रतियोगिता के विजयी बच्चां को पुरस्कृत किया। इस मौके पर मुख्य अतिथियों में वैभव गर्ग, राजेश वर्मा एवं गणमान्य लोग मौजूद थे।

शिविरों का संचालन जान्हवीराज साहू, श्रुति माहेश्वरी तथा प्रतियोगिता का आयोजन वैष्णवी, मानवी, पीहू, शिवंशी, गौरव, अरुण ने किया। शिविर समापन पर मुख्य अतिथियों के समक्ष बच्चों ने सीखी बातों का प्रदर्शन किया।

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पीयूष जयसवाल ने कहा कि बच्चों को संस्कारों और उनकी महत्वता का ज्ञान अवश्य होना चाहिए। संस्कार हमारे माता-पिता से ली पूंजी है। संस्कार का मतलब व्यवस्थित अनुशासन है। साथ ही हमारी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी संस्कारों से ही उजागर होती है। यदि हमारे संस्कार अच्छे होंगे तो लोग हमें अच्छे व्यक्तित्व के तौर पर जानेंगे और यदि संस्कार ठीक नहीं होंगे तो लोग हमें गलत तरीके से जानेंगे।

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पीयूष जयसवाल ने कहा कि यह काफी हद तक बच्चों पर निर्भर करता हैं। संस्कार हमारी पढ़ाई पर कभी भी हावी नहीं हो सकते। संस्कारों में अगर रूढ़िवादिता आ जाए तो बाधा बन जाती है। संस्कार हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं। हमें आज के युग के साथ संस्कारों को लेकर चलना चाहिए। इसलिए बच्चां को सदैव बाल्यकाल से ही संस्कारों का सिंचन किया जाना चाहिए।

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शिविरों में बच्चों को गीता श्लोक, संगीतमय योग, ध्यान, स्त्रोत, आत्मरक्षा के गुर, प्रेरणादायक गीत, प्रश्नोत्तरी, खेल एवं विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें 8 से 16 साल के बच्चे प्रतिभाग कर रहे है और खेलों के साथ संस्कारों का भी ज्ञार्नाजन कर रहे है।

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Written by National TV

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