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प्रयागराज बेल्ट की 8 सीट पर कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानत जब्त

इलाहाबाद / प्रयागराज । 2019 के आम चुनाव में इलाहाबाद, फूलपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर, बांदा जैसी चर्चित सीटों पर कांग्रेस बुरी तरह तो हारी ही लेकिन, इनके प्रत्शियों की जमानत तक जब्त हो गयी है। उत्तर प्रदेश का प्रयागराज परिक्षेत्र देश की आजादी के बाद राजनीति का केंद्र रहा,  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का सबसे पुराना किला रहा, जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास़्त्री जैसे दिग्गज नेताओं की कर्मस्थली रही। लेकिन, इस पूरे कांग्रेसी बेल्ट में 2019 के आम चुनाव में जो हुआ, वह इतना निराशा जनक कभी नहीं था। इस इलाके में कांग्रेस का शायद ही अब इससे बुरा हश्र हो सकता है। कभी एकछत्र राज करने वाला प्रयागराज मंडल का क्षेत्र किस तरह से कांग्रेस से दूर हो चुका है, इसका अंदाजा इस बार लोकसभा चुनाव के रिजल्ट ने साबित कर दिया है। प्रयागराज मंडल समेत आस पास के लोकसभा सीटों पर कांग्रेस न सिर्फ बुरी तरह हारी, बल्कि उसके प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गयी। यह मोदी मैजिक कहा जा रहा है, लेकिन असली सवाल कांग्रेस के नेतृत्व और नीति को लेकर है, जो जनता से लगातार दूर होता जा रहा है।
भाजपा से 60 और कांग्रेस से 30 पर सिमटे योगेश
भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर 2009 में  योगेश शुक्ल इलाहाबाद संसदीय सीट से चुनाव लड़े तो 60 हजार 983 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। उस चुनाव में सपा के रेवती रमण ने यहां से जीत हासिल की थी और उन्हे 209431 वोट मिले थे। वही,  योगेश इस बार टिकट न मिलने पर बीजेपी से बगावत कर कांग्रेस मे चले गये। टिकट मिला और चुनाव लड़े, पर योगेश पिछले चुनाव के बारबर भी वोट नहीं जुटा सके और मात्र 3.59 प्रतिशत वोटों के साथ 31 हजार 852 वोट पर सिमट गये। योगेश इस चुनाव में अपनी जमानत तक नहीं बचा सके और कांग्रेस के लिये यह बेहद ही बुरी हार साबित हुई। जबकि दूसरी ओर बीजेपी से जीत दर्ज करने वाली रीता जोशी को इस सीट से 55.62 मत के तौर पर 493204 वोट मिले हैं। गौरतलब है कि जिन प्रत्याशियों को कुल पड़े मतों का 16 प्रतिशत वोट नहीं मिलता, उनकी जमानत जब्त कर ली जाती है। लोकसभा चुनाव में निर्वाचन नियमों के तहत सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के लिये जमानत राशि 25 हजार रुपये है । जबकि अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिये 12500 और अनुसूचित जनजाति उम्मीदवार के लिये 5 हजार रुपये निर्धारित है.
फूलपुर में कांग्रेस का खराब प्रदर्शन
फूलपुर लोकसभा सीट पर कृष्णा गुट के अपना दल से गठजोड करने के बाद पंकज पटेल को टिकट कांग्रेस ने दिया था। लेकिन, पंकज कोई करिश्मा नहीं दिखा सके और नतीजा ठीक वैसा ही रहा, जैसा कि पहले से अनुमान था। पंकज मात्र 32 हजार वोटों पर सिमट गये और वह भी अपनी जमानत नहीं बचा सके। कांग्रेस को यहां मात्र 3.35  प्रतिशत वोट मिला है। गौरतलब है कि यह इलाका अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल की कर्मस्थली रहा और पंकज सोनेलाल के दामाद थे। लेकिन, जनता पर सिर्फ पीएम मोदी का ही जादू चला। इस सीट पर भाजपा की केशरी देवी पटेल को 544701 वोट मिले। जो कुल पडे मतों का 55.68 प्रतिशत वोट है।
प्रतापगढ़ में हिली नींव
प्रतापगढ़ में कांग्रेस ने एक बड़ा और सियासी कुनबे का चेहरा उतारा था। यहां से राजुकुमारी रत्ना सिंह प्रत्याशी थे। इनके लिये प्रियंका गांधी से लेकर हर बड़े कांग्रेसी नेता ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन वह भी अपनी जमानत नहीं बचा सकी। प्रमोद तिवारी इस इलाके में लगातार डटे रहे। जिसका असर सिर्फ इतना रहा कि प्रयागराज मंडल में सर्वाधित वोट इसी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को मिले और 8.43 प्रतिशत वोटों के साथ वह चौथे स्थान पर रही। रत्ना सिंह को 76686 वोट मिला है। जबकि यहां से भाजपा के विजयी प्रत्याशी संगम लाल गुप्ता 47.7 मतों के साथ 434222 वोट पाने में सफल रहे।
कौशांबी में कुछ नहीं बचा
कौशांबी लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने बसपा से आये गिरीश पासी को टिकट दिया था और जमीनी नेता के सहारे जीत की उम्मीद की थी। लेकिन, गिरीश का जादू लोकसभा में नहीं चला और वह भी अपनी जमानत नहीं बचा सके। गिरीश को यहां मात्र 1.69 प्रतिशत वोट मिला और वह 16384 वोट पर सिमट गये और कांग्रेस की यह सबसे बुरी हार साबित हुई है। यहां से बीजेपी के विनोद सोनकर ने 381517 मत हासिल किये जो कि कुछ वैध मतों का 39.31 प्रतिशत वोट था। इस सीट पर चुनाव बेहद ही दिलचस्प रहा है।
यहां भी जब्त हुई जमानत
जौनपुर में कांग्रेस प्रत्याशी देवव्रत मिश्रा को 2.61 प्रतिशत वोट मिले और वह 27107 वोट पर सिमट गये और अपनी जमानत नहीं बचा सके। यह सीट बहुजन समाज पार्टी के श्याम सिंह यादव ने 520046 वोट हासिल कर जीती है।
बांदा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी बालकुमार पटेल को 75350 वोट मिले जो कुल वैध मतों का 7.29 प्रतिशत था। यहां से बीजेपी के आरके पटेल ने जीत हासिल की है और उन्हे 477100 वोट मिले हैं।
भदोही से कांग्रेस के रमाकांत को 2.46 प्रतिशत वोट के साथ 25508 वोटो से संतोष करना पड़ा और अपनी जमानत राशि गंवानी पड़ी। इस सीट से भाजपा के रमेश चंद ने 508989 वोट हासिल कर चुनाव जीता। रमेश को 49.07 प्रतिशत वोट मिले।
मिर्जापुर में ललितेश त्रिपाठी कांग्रेस के प्रत्याशी थे और 8.25 प्रतिशत मतयानी 91392 मत हासिल कर सके और चुनाव हारने के साथ अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। जबकि इस सीट पर बीजेपी अद गठबंधन की अनुप्रिया पटेल ने 53.34 प्रतिशत मतों के साथ जीत हासिल की। अनुप्रिया को 591564 वोट मिले।
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Written by Amarish Shukla

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