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चैती महोत्सव; कामरूह कामाख्या नाटक व दुर्गेश के कलारिपयट्टू युद्ध नृत्य ने समां बांधा

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लखनऊ। श्रीराम लीला समिति ऐशबाग के तुलसी शोध संस्थान के तत्वावधान में श्रीराम लीला परिसर के प्रांगण में चल रहे भारतीय नववर्ष मेला एवं चैती महोत्सव-2019 की सातवीं सांस्कृतिक संध्या में आज शाम व्योम के बांसुरी वादन व दुर्गेश के कलारिपयट्टू युद्ध नृत्य ने समां बांधा। chaiti mahotsav indian new year shriram lila samiti tulsi shodh sansthan kamrooh kamakhya

समारोह में श्रीराम लीला समिति के सचिव पंडित आदित्य द्विवेदी और अध्यक्ष हरीश चन्द्र अग्रवाल ने तारा चन्द्र अग्रवाल को गरीब लड़कियों का विवाह, आपदा, दैवीय विपत्तियों में मानव सेवा के लिए तुलसी गौरव सम्मान-2019 से सम्मानित किया।

चैती महोत्सव के आज का आकर्षण रहा भास्कर नाट्य कला केन्द्र कोलकाता की नाट्य प्रस्तुति कामरूह कामाख्या कथा वर्णन। कामरूह कामाख्या नाट्य सारानुसार भगवान शिव शंकर की पत्नी माता पार्वती को पता चलता है कि उनके पिता एक बहुत बड़ा यज्ञ कर रहे हैं, इस बात को वह शंकर जी को बताती हैं, लेकिन शंकर जी कहते हैं कि मैं तो बिना बुलाए नही जा सकता, इस पर सती जी शंकर जी से कहती हैं कि मैं यज्ञ में जा रही हूं, जब वह यज्ञ में पहुंचती हैं तो वह पिता द्वारा अपमानित होती हैं और स्वयं को अग्निकुण्ड में अर्पित कर देती हैं।

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इस बात की सूचना जब शंकर जी को लगती है तो वह सती जी को कंधे पर उठाकर वहां से हिमालय पर्वत पर पहुंचते हैं, इस दौरान माता सती के अंग रास्ते में गिरते जाते हैं। माता सती के वियोग में शंकर जी एकाग्रचित होकर बैठ जाते हैं, इस बात की भनक लगते ही सारे देवता कामदेव और रति को शंकर जी के पास भेजते हैं कि उनका घ्यान भंग करें। देवताओं के कहे जाने पर वह दोनों शंकर जी के पास पहुंचते हैं और उनका ध्यान भंग करने में सफल हो जाते हैं।

इस बात से नाराज होकर शंकर जी कामदेव को भस्म कर देते हैं इस घटना से आहत होकर रति, शंकर जी से कहती है वह कामदेव को पुनः जीवित कर दें। इस पर शंकर जी कहते हैं कि कामदेव को कामाख्या स्थान पर पुनः जन्म लेना पडे़गा, जहां पर माता सती का योनी अंग गिरा है। इसके उपरान्त कालान्तर में कामदेव पुनः जन्म लेकर उत्पन्न होते हैं। यहीं पर नाट्य प्रस्तुति समाप्त होती है।

संगीत से सजे कार्यक्रम का आरम्भ एबीसीडी डांस एकेडमी के पंकज चैहान ने संस्कार नृत्य की मनोरम छटा बिखेरी। पंकज चैहान ने गर्भ, पंसवन, सीमंतोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकरण, कर्णवेध, विद्यारम्भ, उपनयन, वेदारम्भ, केशान्त, समावर्तन, विवाह संस्कार पर किए जाने वाले संस्कार नृत्य को प्रस्तुत कर दर्शकों को भारतीय संस्कृति से अवगत कराया।

मन को मोह लेने वाली इस प्रस्तुति के उपरान्त स्वाति श्रीवास्तव ने गणेश वंदना सिन्दूर लाल चढ़ायो पर भावपूर्ण अभिनय युक्त नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को भगवान गणेश जी की भक्ति का रसपान कराया। इसी क्रम में स्वाति श्रीवास्तव के नृत्य निर्देशन में शीलू, वैष्णवी, शालू, आकांक्षा, अदिति, साक्षी, जयोति, आराध्या, आर्या, आरूषी, सचिन श्रीवास्तव और स्वाति ने रंगी सारी चुनरिया, वृन्दावन में रास रचाए, कृष्णा कृष्णा राधा राधा पर भावपूर्ण अभिनय युक्त नृत्य प्रस्तुत कर कलाप्रेमी दर्शकों को भगवान श्रीकृष्ण और राधा के साक्षात् दर्शन करवाए।

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चैती महोत्सव की आज की शाम का केन्द्र बिन्दु रहा टाइगर एकेडमी के दुर्गेश मिश्रा का कलारिपयट्टू युद्ध नृत्य। दुर्गेश ने तलवार युद्ध, मल्ल युद्ध, लाठी और ढाल द्वारा किए जाने वाले युद्ध को नृत्य के रूप में प्रस्तुत कर दर्शकों को प्राचीन भारतीय युद्धकला से अवगत कराया।

हृदय को रोमांचित कर देने वाली इस प्रस्तुति के उपरान्त बाल कलाकार व्योम आहूजा ने पाश्चात्य वाद्ययंत्रों पर भारतीय राग रागिनीयों को अवतरित कर श्रोताओं का दिल जीता। व्योम ने अपने कार्यक्रम का आरम्भ शंख पर शंखनाद कर पूरे रामलीला परिसर को भारतीय संस्कृति से सुरभित कर दिया।

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इसी क्रम में व्योम ने जायोफोन पर ओम जय जगदीश हरे की धुन बजाकर श्रोताओं को भाव-विभोरकर दिया। भक्ति भावना से ओतप्रोत इस प्रस्तुती के उपरान्त व्योम ने बांसुरी पर वंदेमातरम् और जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती हैं बसेरा की धुन बजाकर श्रोताओं में देशप्रेम की भावना जागृत की। इसी क्रम में उन्होंने डोमबैक पर इजिप्ट की लोकधुन बजायी और ड्रम पर सालसा बिट्स बजाकर श्रोताओं का दिल जीता।

राम नवमी पर्व पर विशेष प्रस्तुतियां होगी जिसके अन्तर्गत अमृत सिन्हा ग्रुप द्वारा सकल नृत्य संगम, विभू बाजपेयी द्वारा स्तुति नृत्य, कोलकाता भाष्कर नाट्य कला केन्द्र का वीर एकलव्य नाटक और वृन्दावन की गीताजंलि शर्मा का ब्रज की होली व मयूर नृत्य होगा।

Written by Ranjeev Thakur

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