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बीजेपी के इटावा से प्रत्याशी रामशंकर कठेरिया को बडी राहत, स्पेशल कोर्ट ने खत्म किया मुकदमा

प्रयागराज / इलाहाबाद  :चुनावी माहौल के बीच बीजेपी के इटावा से प्रत्याशी रामशंकर कठेरिया को बडी राहत मिली है। आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में कोर्ट की सख्ती का सामना कर रहे कठेरिया को प्रयागराज की सांसद विधायक स्पेशल कोर्ट ने मुकदमे से बरी कर दिया है और उनका मुकदमा समाप्त कर दिया है। स्पेशल कोर्ट ने कहा कि प्रकरण में एफआईआर के बाद दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लिया जाना विधि विरुद्ध है। ऐसे में मुकदमे का कोई अवचित्य नहीं है। गौरतलब है कि इस मुकदमे की पिछली सुनवाई पर स्पेशल कोर्ट ने कठेरिया की मुश्किल बढा दी थी और गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुये चेतावनी दी थी कि अगर वह अगली सुनवाई पर हाजिर नहीं हुये तो उनके विरूद्ध संपत्ति जब्त करने के लिए कुर्की की कार्रवाई शुरू की जायेगी। कठेरिया के मुकदमे में सपोर्ट और सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुकदमे को गलत माना और मुकदमा समाप्त कर दिया है।
गौरतलब है कि रमाशंकर कठेरिया बीजेपी के बडे नेता हैं । आगरा से सांसद रहने के साथ ही वह एससी-एसटी आयोग के चेयरमैन भी हैं। हालांकि इस बार उनका टिकट आगरा कट गया है औरा वह इटावा से प्रत्याशी बनाये गये है।
क्या है मामला
स्पेशल कोर्ट में चल रहे मुकदमे के अनुसार 2012 में चुनाव के दौरान रमाशंकर कठेरिया व अन्य लोगों ने आचार संहिता का उल्लंघन किया था । जिस पर आगरा के हरी पर्वत थाने में एसओ प्रीतम सिंह ने सांसद रमा शंकर कठेरिया समेत दर्जनों लोगों के विरूद्ध आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा दर्ज कराया था। इन पर आरोप था कि नामांकन का समय खत्म हो जाने के बाद भी इनके साथ हजारों समर्थक जुलूस निकाल कर नारेबाजी कर रहे थे। इस दौरान सडक पर यातायात भी प्रभावित हुआ। इन्ही मामलों को लेकर दर्ज मुकदमें चार्ज सीट दाखिल हुई थी और अब यह मुकदमा ट्रांसफर होकर प्रयागराज की स्पेशल कोर्ट आया हुआ है। जहां उनके विरूद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था और हाजिर न होने पर संपत्ति जब्त करने के लिए कुर्की की नोटिस जारी करने की चेतावनी दी गयी थी। इस मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को पूरी हुई तो कोर्ट ने पया कि मुकदमें में एफआईआर के बाद दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लिया गया था। जबकि जिस धारा में मुकदमा लिखा जाना था उस धारा में मुकदमा ही दर्ज नहीं किया गया था।
अवर न्यायालय का आदेश निरस्त
स्पेशल कोर्ट ने सुनवाई के द्वारा अवर न्यायालय द्वारा जारी प्रंसज्ञान आदेश को निरस्त कर दिया साथ ही यह छूट दी है कि अगर वादी चाहे तो अभियुक्त के खिलाफ परिवाद उचित धाराओं में दाखिल कर प्रकरण का संचालन कर सकता है। दरअसल पुलिस ने 30 जून 2015 को आईपीसी की धारा 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया  था। पुलिस ने विवेचना उपरांत आरोप पत्र दाखिल किया जिस पर कोर्ट ने 30 सितंबर 2015 को  संज्ञान लिया था। इसके बाद कठेरिया ने भी इस मुकदमें में अपनी ओर से संज्ञान आदेश के खिलाफ निगरानी दाखिल कर दी और संज्ञान आदेश को चैलेंज करते हुये कोर्ट में अर्जी दी की उनपर धारा 188 के तहत परिवाद दाखिल किया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया है, इसलिये इस मुकदमे का कोई अवचित्य नहीं बनता है।
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Written by Amarish Shukla

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