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हत्या के बाद वकील खुद कर रहा था सड़क पर प्रदर्शन, पुलिस पर बना रहा था खुलासे का दबाव अब निकला कातिल

इलाहाबाद / प्रयागराज : कभी कभी क्रिमिनल अपने ही फेंक जाल में कैसे उलझ जाते हैं, इसका ताजा उदाहरण प्रयागराज में एडवोकेट सुशील हत्याकांड में देखने को मिला। अपने पाटर्नर वकील की हत्या के बाद आरोपी खुद ही सड़क पर प्रदर्शन करने उतारा, हड़ताला तालाबंदी, नारेबाजी में आगे नेतृत्व करता रहा। मुकदमा दर्ज कराने से लेकर परिजनों की मदद का प्रोपोडंडा करता रहा और पुलिस पर मामले का खुलासे का दबाव बनाता रहा। लेकिन जब मामला खुला तो हर कोई चौंक गया। सच्चा हितैसी बन रहा दोस्त ही कातिल निकला। पुलिस ने शुक्रवार की शाम प्रेस कांफ्रेंस कर सुशील हत्याकांड का खुलासा करते हुये सुशील के साथी अधिवक्ता रमेश चंद निगम समेत चार लोगों को मीडिया के सामने पेश किया और देर रात उन्हे जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार रमेश ने प्रॉपर्टी डीलिंग में लेनदेने के विवाद में वकील सुशील को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया था और पांच लाख रुपये व जमीन बिक्री का 25 प्रतिशत कमीशन देने का लालच देकर शूटरों को हायर कर सुशील को खत्म करा दिया। सुशील पर इससे पहले भी हत्या का मुकदमा दर्ज था, पुलिस उसकी क्रिमिनल हिस्ट्री भी तलाश रही है।
शातिर निकले हत्यारे
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसएसपी अतुल शर्मा ने बताया कि  23 जून को सोरांव के लेहरा तिवारीपुर निवासी अधिवक्ता सुशील कुमार पटेल की फाफामऊ में गोहरी क्रॉसिंग के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मुकदमे के बाद जांच शुरू हुई तो मोबाइल डिटेल में शिवकुटी के अधिवक्ता रमेश चंद्र निगम से सबसे अधिक बातचीत का रिकार्ड सामने आया। पुलिस को प्राइम सस्पेक्ट मिल गया था। लेकिन परिजनों ने रमेश को आरोपी बनाने से इन्कार करते हुये उसे दोस्त बताया, वहीं दूसरी ओर रमेश प्रदर्शन, तालाबंदी और आंदोलन के साथ पुलिस पर खुलासे का दबाव बना रहा था और ऐसी हरकत कर रहा था कि उस पर शक ही ना हो। परिजनों द्वारा मुकदमा दर्ज कराने में भी उसने मदद की और सच्चा हितैसी बनकर हर जगह अगुवाई कर रहा था। पुलिस ने बैकडोर से अपनी जांच आगे बढाई तो प्रॉपर्टी डीलिंग का जुडाव सुशील व निगम में मिला । पता चला कि दोनों में लेन देन को लेकर बडे स्तर पर विवाद पहुंच चुका था। पुलिस ने सुशील के सभी प्रॉपर्टी डीलिंग पाटर्नर को उठाया और पार्टनर मोण् इरफान अंसारी समेत, शिवकुमार व चंद्रशेखर से अपने तरीके से पूछताछ शुरू की। पुलिस की कडाई के बाद आरोपित टूट गये और हत्या की बात कबूल ली। इनके पास से पुलिस ने 7400 की नगदी समेत तीन मोबाइल, तमंचा, कारतूस व कार बरामद की है। लिखापढ़ी के बाद सभी को जेल भेज दिया गया है।
किसकी क्या थी भूमिका
पुलिस के अनुसार सुशील की हत्या में चार लोग शामिल थे। इनमें शिवकुटी का रहने वाला रमेश चंद्र निगम  मुख्य साजिशकर्ता था। इसने ही हत्या का पूरा प्लान बनाया और फिर अपने पार्टनर  इरफान अंसारी निवासी शांतिपुरम फाफामऊ से मुलाकात की। इरफान ने ही. शूटरों का इंतजाम किया और दो शूटर बुलाये। जिनमे शिवकुमार यादव उर्फ जासूस निवासी शिवकुटी व चंद्रशेखर उर्फ आजाद निवासी गद्दोपुर को वारदात अंजाम देने के लिये एडवांस दिया गया। घटना के दिन चंद्रशेखर बाइक चला रहा था और पीछे बैठे शिवकुमार ने चलती बाइक पर ही सुशील को तमंचा सटाकर गोली मार दी थी। पुलिस ने बताया कि अधिवक्ता रमेश  हत्या के मामले में पहले ही नामजद हो चुका है। जबकि शिवकुमार पर भी हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है और उस पर गैंगस्टर के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है।
85 लाख की रकम बनी बजह
पुलिस ने बताया कि सुशील को अपने सभी पाटर्नर में सबसे ज्यादा परसेंट का मुनाफा मिलता था। हालांकि वह इसे जबरन लेता था, जिसे बाकी अन्य तीनों पार्टनर में खुन्नस बढ रही थी। पिछले दिनों बसना नाले के पार की जमीन को 85 लाख में बेंचने का सौदा तय हुआ था। इसमें सुशील ने 60 परसेंट की हिस्सेदारी मांगी और यहीं से मामला बिगड़ गया। सुशील ने ज्यादा फायदा व बार बार कांटा बन चुके सुशील को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया और इरफान के साथ मिलकर शूटरों से उसे गोली मरवा दी। हालांकि शूटर भी प्रापर्टी डीलिंग में पाटर्नर थे पर जब उन्हे इस काम के लिये 5 लाख नगद और 85 लाख की जमीन सौदा का 25 प्रतिशत रकम देने का ऑफर मिला तो वह हत्या को राजी हो गये और  10 हजार रुपये बतौर पेशगी लेकर हत्या के लिये रेकी शुरू की।
क्या हुआ घटना वाले दिन
प्लान के अनुसार सुशील के घर के पास में शिवकुमार व चंद्रशेखर ने रेकी शुरू की। लेकिन, सुशील घर से अकेले बहुत कम ही बाहर निकल रहा था। घटना वाले दिन शाम चार बजे के करीब सुशील श्रृंगारपुर स्थित चक्की जाने लगा तो दोनों शूटर भी बाइक से पीछे लग गये। आश्चर्य की बात यह रही कि इस दौरान रमेश शूटरों से लगातार बात भी कर रहा था। सड़क पर भीड भाड होने व दिन होने के कारण शूटरों ने सुशील पर गोली नहीं चलाई, लेकिन जब सुशील शाम को घर लौटने लगा तो  गोहरी क्रॉसिंग के पास मौका पाकर उन्हें गोली मार दी। इसके बाद बाइक चला रहे चंद्रशेखर ने तेज रफ्तार से बाइक मोड़ कर सड़क से आगे कच्चे से रास्ते में उतार ली और अंदर के रास्ते से भाग निकले।
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Written by Amarish Shukla

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