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नहाय खाय के साथ लोक-आस्था का महापर्व चैती छठ पूजा आज से हुआ शुरू

नेशनल टीवी इंडिया : (ब्यूरो रिपोर्ट बिहार-झारखंड) नहाय-खाय के साथ 21मार्च दिन बुुुधवार से लोक-आस्था का महापर्व चैती छठ आज से शुरू हो गया है. अहले सुबह व्रती पवित्र गंगा मेें स्नान कर चार दिवसीय चैती छठ पूजा की अनुष्ठान की शुरुआत कर दिया है. आज व्रती गंंगा स्नान के साथ गंगा जल से नहाय खाय का प्रसाद के रूप मेें चने की दाल ,अरवा चावल कद्दू (लौकी)महत्वपूर्ण है. जिसे व्रती बनाने के बाद सूर्य देव को भोग लगाने के ग्रहण करती है. 

बता दें कि छठ पूजा उत्तर भारत में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसे पूरे देश में बड़े हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है. लेकिन पूर्वी भारत में इस पर्व का अलग ही उत्साह देखने को मिलता है. यह पर्व मुख्य रूप से सूर्य देव की आराधना के रूप में मनाया जाता है. 

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वर्ष में कुल दो बार छठ पर्व मनाया जाता है– 1. चैत्र में जिसे चैती छठ पूजा कहते है और 2. कार्तिक में जिसे छठ पूजा कहा जाता है.हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नए साल के पहले महीने यानी चैत्र की षष्ठी तिथि को मनाए जाने के कारण इस पर्व को चैती छठ कहा जाता है. इंग्लिश कैलेंडर के हिसाब से यह मार्च-अप्रैल के महीने में आती है. होली के कुछ दिनों बाद मनाये जाने वाले इस पर्व को पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड) और उत्तर भारत में कुछ हिस्सों में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. कर्तिक छठ की ही तरह चैती छठ भी 4 दिनों का पर्व है जिसमे – नहाय खाय, खरणा, संध्या घाट और भोरवा घाट सम्मिलित है.


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चैती छठ की डेट 21 मार्च 2018 : आज नहाय खाय22 मार्च 2018 : खरणा23 मार्च 2018 : पहला अर्घ्य24 मार्च 2018 : सुबह का अर्घ्यछठ पर्व कैसे मनाया जाता है?ये त्यौहार चार दिन का होता है. इस पर्व में चारो दिन का अपना-अपना महत्व होता है. वर्ष 2018 में चैती छठ 21 मार्च से प्रारंभ होकर 24 मार्च तक होगी. छठ पूजा प्रारंभ होने के पहले दिन को नहाय खाय कहते है. इस दिन घर की पूरी सफाई करके घर को शुद्ध किया जाता है. उसके बाद छठव्रती स्नान आदि करके शुद्ध भोजन करते है. दूसरे दिन खरना का कार्यक्रम होता है. इस दिन मुंह में एक तिनका डाले बिना प्रसाद तैयार किया जाता है. और शाम को भोजन किया जाता है. इस दौरान पुरे घर की स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखा जाता है.व्रत के लिए रखना होता है खास शुद्धता का ध्यान 

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व्रत रखने वाले को पूरी शुद्धता का ध्यान रखा चाहिए. इसके अतिरिक्त उसे परिवार से अलग कमरे में एक चद्दर या कंबल पर जमीन पर ही सोना होता है. तीसरा यानि षष्ठी तिथि का दिन चैती छठ पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है. इसी दिन सभी रस्मो को किया जाता है और सूर्य देव का आशीर्वाद लिया जाता है. तीसरे दिन संध्या अर्घ्य दिया जाता है. इस दिन छठ प्रसाद बनाया जाता है. प्रसाद में ठेकुआ, चावल के लडडू आदि बनाते है. और विधि अनुसार डूबता हुए सूर्य को अर्घ्य देते है. व्रत के अंतिम और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. पूजा सम्पूर्ण करने के पश्चात कच्चे दूध का शर्बत पीकर और थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत सम्पूर्ण किया जाता है.दानापुर से लेकर पटना सिटी तक के घाटों पर तैयारीलॉ कॉलेज घाट, दमराही घाट, गायघाट, भद्र घाट, महावीर घाट, नौजर घाट, दुली  घाट, मीतन घाट, खाजेकलां  घाट, झाऊगंज घाट, अदरक घाट व पथरी घाट पाटीपुर  पुल, दीघा आदि घाटों पर हजारों की संख्या में छठव्रती पहुंचते हैं. इसे  लेकर घाटों की सफाई की जाती है. इसके बाद लाइटिंग व बांस-बल्ला भी लगाया जाता है. व्रत के साथ पर्व के निमत्ति उपयोग में आनेवाली पूजन सामग्री व फलों के साथ सूप, दउरा, नारियल, आम की लकड़ी व शुद्ध घी के साथ अन्य सामान की खरीदारी काे लेकर अभी से बाजार भी सजने लगे हैं.

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Written by National TV

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