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क्या लड़्कियों की कामयाबी में उनकी सुंदरता का अहम रोल होता हैं ??

दो मित्रों की वार्तालाप का परिणाम यह मुद्दा,  उन दोनों मित्रों का मानना था कि  लड़्कियों की कामयाबी में उनकी सुंदरता का अहम रोल होता हैं| वह दोनों मित्र इसका निष्कर्ष ढूंढ रहे थे  कि खूबसूरत होना इस दुनिया में कितना आवश्यक है? एक बदसूरत लड़की के लिए कितना मुश्किल है जब खूबसूरत लड़कियों से  वो टक्कर लेतीं है?

फिर आत्ममंथन शुरू किया उनकी  मोटर साइकिल की यात्रा ने इसे एक दूरी तक चर्चा का विषय बनाए रखा | फिर भी परिणाम न मिलने पर कुछ घंटों बैठकर इन प्रश्नों  के उत्तर खोजे गए|

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,उसमें जीत की लालसा तो अवश्य रहती हैं किन्तु एक कसक सी उसे अंदर अंदर कचोटती रहती है| वही दूसरी तरफ सुंदर  लड़कियाँ अपनी खूबसूरती से सभी का दिल आसानी से जीत लेतीं है,वही सांवली लड़की या शारीरिक बनावट मे कमी वाली लड़कियां संकोच,आत्मविश्वास की कमी,व अपनी बनावट को लेकर ज्यादा चिंतित रहती हैं।जिस कारण वह किसी भी स्थान पर हत्तोत्साहित जल्द हो जाया करती हैं।


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  बचपन से ही लड़कियों को स्कूलों में वार्षिक उत्सवों के माध्यम से अपने आत्मविश्वास का मंच दिया जाता है जिससे वह अपनी चेहरे की खूबसूरती व बदसूरती से न जूझकर अपने गुणों में परिपक्व हो ।किन्तु कुरूपता के कारण लड़कियां पीछे हटने लगती हैं वह स्कूलों के कार्यक्रम में भाग लेने से कतराती है। 

अभी हाल ही में एक घटना आँखों के सामने गुजरी जिससे मैं पुन: विचार करने पर विवश हो गयी कि यह दुनिया सिर्फ़ ग्लैमर पर टिकी है यहाँ लड़कियां यदि साधारण कपड़े या गरीब है तो यही समाज उन्हें हीन दृष्टि से देखता है।

एक लड़की श्रेया जिसका हाल मे ही विवाह हुआ,चेहरे की बनावट व कम खूबसूरत होना जैसे उसके लिए अभिशाप हो गया, इसलिए लड़के वालों ने दहेज में अच्छी रकम ली,शादी तो अच्छे ढंग से हो गयी लेकिन शादी के कुछ ही दिनों बाद लड़की के साथ उसका पति बुरा बर्ताव करने लगा,जब भी उसे मौका मिलता उसका अपमान करता,अकेले में उसका चेहरा हाथों से छूता और धक्का दे देता ,बुरी तरह जलील करता इतना की लड़की तड़प उठती। 

श्रेया मन ही मन आत्महत्या की सोचने लगी क्योंकि उसका पति उससे नफरत करने लगा।उसे लगा कि अब उसकी पुरी जिन्दगी तबाह हो गयी हैं। अपनी कुरूपता को कारण मान कभी कभी वह स्वयं को यातना देती हैं ।

पति से प्यार व सम्मान न मिलने पर श्रेया मायके आ गयी लेकिन मायके वालों ने भी उसकी कुरूपता को कोसने मे कसर न की,इन सभी परिस्थितियों में श्रेया ने निर्णय लिया कि वह अपने पैरों पर खड़ी होगी,न परिवार न पति उसका अपना स्वाभिमान भी तो है यह सोचकर उसने कई जगह प्राइवेट जॅाब के लिए कोशिश करना शुरू कर दिया। श्रेया को हर जगह से रिजेक्ट कर दिया गया कारण उसका बदसूरत होना।

श्रेया ने प्राइवेट सेक्टर से हारकर गवर्नमेंट जॅाब का विचार बनाया और लग गयी तैयारी में कुछ दिनों तक उसने शान्त चित्त से सभी की अवहेलना बर्दाश्त की और सिर्फ़ पढ़ाई पर फोकस किया ,वह समझ गयी थी कि प्राइवेट कम्पनी खूबसूरत लड़कियों को जगह देती हैं जिससे उनका बिजनेस अच्छा चले,ग्राहक को आकर्षित करने के लिए खूबसूरती आवश्यक है। इस सच को समझकर श्रेया ने अपनी तैयारी में रात-दिन एक कर दिए।

जब उससे बात हुई तो मालूम हुआ उसने रेलवे का इक्जाम क्लीयर कर लिया है और उसकी जॅाब लग गयी है। मन खुश हो गया  यह सुनते हुए कि आखिर उसकी तपस्या सफल हुई। एक सीख भी मिली कि खूबसूरती से हम चार दिनों तक किसी को अपनी ओर आकर्षित कर सकते है किन्तु पाँचवें दिन हमारी खूबसूरती भी कम होकर हमें ही कोसने लगती हैं।

श्रेया का जीवन उसके अपने प्रयास ने बदल दिया।वही पति जो उसका चेहरा हाथ में लेकर उसे धक्का दिया करता था उसके आगे-पीछे मडराने लगा किन्तुअब श्रेया दुविधा में है क्या उसे उस पति के साथ रहना चाहिए या अकेले ही जीवन निर्वाह करना चाहिए?

यदि वह उसके साथ रहने लगती हैं तो कहीं वह उसे फिर से यातना न देना प्रारंभ कर दें क्योंकि उसने बड़ी कठिनाई से अपने जिन्दगी के मुश्किल पलों को भुलाया था और कहीं फिर से उसे आत्महत्या का विचार न आने लगे?

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रक्षा यथार्थ

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Written by National TV

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