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इच्छामृत्यु पर क्या कहता हैं सुप्रीम कोर्ट, एक क्लिक में जानिए

इच्छामृत्यु को कुछ लोग गलत मानते हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु को सही ठहराया हैं लेकिन उसके लिए कुछ शर्ते में रखी हैं जो आज मैं आपको बताने वाला हूँ. नमस्कार दोस्तों मैं शिवराम आपके लिए लेकर आया हूँ कुछ ऐसी जानकारी जो आपको कही नहीं मिलेगी. 

चलिए शुरू करते हैं –

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वैसे तो कहा जाता हैं कि मौत ऊपर वाले के हाथ होती हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि मौत भी दो प्रकार की होती हैं. तो दोस्तों सबसे पहले हम जानेंगे कि मौत के कितने रूप हैं? हिन्दू धर्म के अनुसार मौत दो प्रकार की होती हैं एक अकाल मृत्यु और दूसरी काल मृत्यु .

अकाल मृत्यु –जब किसी जीव की मृत्यु बिना समय के अर्थात हत्या, दुर्घटना, आत्महत्या से होने वाली मौत को अकाल मृत्यु कहा जाता हैं. 


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काल मृत्यु-जब किसी जीव की मौत उसके लिखे हुए समय के अनुसार होती हैं तो उसे काल मृत्यु कहा जाता हैं. हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान् शिव / महाकाल की आराधना करने वालो को कभी भी आकाल मृत्यु का सामना नहीं करना पड़ता . उन्हें काल के आधार पर ही मृत्यु प्राप्त होती हैं. दोस्तों बहुत से लोग इसे मिथ्या या अंधविश्वास भी मानते हैं लेकिन जो महाकाल अर्थात भगवान् शिव की आराधना करते हैं उनके अनुसार यह बात पूर्ण सत्य पर आधारित होती हैं. 

ये तो थी मृत्यु पर क्या कहता हैं हिन्दू धर्म. अब बात करते हैं भारतीय न्यायलय क्या कहता हैं इच्छामृत्यु पर?

दोस्तों भारतीय सविधान के अनुसार इच्छामृत्यु को एक अपराध माना जाता हैं और इसके लिए सजा का भी प्रावधान हैं अगर सुसाइड करने वाला व्यक्ति किसी कारण बच जाता हैं तो उसे भारतीय कानून के अनुसार सजा मिलती हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने आज के आदेश में इच्छामृत्यु को सही ठहराया हैं.

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार (9 मार्च) को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मरणासन्न व्यक्ति द्वारा इच्छामृत्यु के लिए लिखी गई वसीयत (लिविंग विल) को सशर्त मान्यता दे दी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हर व्यक्ति को गरिमा के साथ मरने का अधिकार है और किसी भी इंसान को इससे वंचित नहीं किया जा सकता. 

सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु के लिए एक गाइडलाइन जारी की है, जो कि कानून बनने तक प्रभावी रहेगी. दीपक मिश्रा की अगुवाई में पांच जजों की संवैधनिक पीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया. भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के अन्य सदस्य भी न्यायालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों और हिदायतों से इत्तेफाक रखते हैं. 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 5 अहम बिंदू:

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लिविंग विल को कुछ शर्तों के साथ मंजूर दी गई.कानून बनने तक सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को मानना होगा.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यक्ति को गरिमा के साथ मरने का अधिकार.सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन में कहा गया कि लाइलाज बीमारी होगी तो लिखकर देना होगा.असाध्य रोग से ग्रस्त व्यक्ति ने उपकरणों के सहारे उसे जीवित नहीं रखने के संबंध में यदि लिखित वसीयत दिया है, तो यह वैध होगा.

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Written by National TV

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